बालेश्वर मेरे पसंदीदा भोजपुरी गायकों में से हैं. आ रे रे रे ..... से गीतों की शुरुआत इनकी ख़ास शैली है. शायद ही कोई सामाजिक प्रश्न हो जिस पर बालेश्वर ने अपने गीत के माध्यम से कटाक्ष न किया हो. अगर किसी मित्र के पास इनके और गीत हो तो कृपया ज़रूर सुनवाइएगा. फिलहाल दहेज़-प्रथा पर इनके इस गीत का लुत्फ़ उठाएं.
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1.7.08
24.4.08
तू गंगा की मौज मैं यमुना की धारा ....
यू ट्यूब से ही एक और पसंदीदा गीत. याद है मारवाड़ी हाई स्कूल में 1988 में दिखलायी गयी थी फिल्म बैजू बावरा. पहली बार देखा था टीन की पेटी में नाग की तरह कुंडली मारे फिल्म के रिल. हमारे क्लास के साथ वाले हॉल में प्रॉजेक्टर के सहारे दीवार पर 'बैजू बावरा ' देखते हुए हम बहुत आश्चर्यचकित हो रहे थे. लीजिए शायद आप भी पुरानी यादें ताज़ा कर पाएं.
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